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छत्तीसगढ़ की 9 पार्टियों सहित देश की कुल 345 गैर मान्यता प्राप्त राजनैतिक पार्टियों पर संकट, चुनाव आयोग ने थमाया नोटिस

जवाब प्रस्तुत करने 15 दिन की मोहलत

NNH नई दिल्ली/ चुनाव आयोग ने पिछले छह साल से निष्क्रिय 345 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपीएस) की सूची से हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। आयोग की नोटिस में कहा गया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के प्राविधानों के अन्तर्गत भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत राजनैतिक दलों द्वारा वर्ष 2019 से 6 वर्षों तक किसी भी निर्वाचन प्रक्रिया में हिस्सा नही लिया है, अथवा कोई भी चुनाव नही लड़ा है। जिसके चलते भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली ऐसी राजनैतिक पार्टियों को नोटिस थमाया है। जिसमें उत्तर प्रदेश के 119, छत्तीसगढ़ की 9 राजस्थान की 9 पार्टियों सहित देशभर की कुल 345 पंजीकृत अमान्यत्ता प्राप्त राजनैतिक पार्टियां शामिल हैं।

पिछले छह साल यानी 2019 से चुनाव नहीं लड़ने वाले राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है। आयोग ने ऐसे सभी पार्टियों को सूची से हटाने के संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए हैं। फिलहाल इन पार्टियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग अपना फैसला लेगा कि इन पार्टियों को सूची से बाहर करना है या नहीं।

छत्तीसगढ की जिन 9 पार्टियों को नोटिस थमाया गया है, उनमें…
छत्तीसगढ़ एकता पार्टी
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
छत्तीसगढ़ समाजवादी पार्टी
छत्तीसगढ़ संयुक्त जातीय पार्टी
छत्तीसगढ़ विकास पार्टी
पृथक बस्तर राज्य पार्टी
राष्ट्रीय आदिवासी बहुजन पार्टी
राष्ट्रीय मानव एकता कांग्रेस पार्टी
राष्ट्रीय समाजवादी स्वाभिमान मंच के नाम शामिल हैं।

तो राजस्थान की भी ऐसी 9 पार्टियाँ हैं। इनमें पूर्व बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की पार्टी का नाम भी शामिल है, जिनमें
राजस्थान जनता पार्टी
राष्ट्रीय जनसागर पार्टी
खुशहाल किसान पार्टी
भारत वाहिनी पार्टी
भारतीय जन हितकारी पार्टी
नेशनल जनसत्ता पार्टी
नेशनल पीपुल्स फ्रंट
स्वच्छ भारत पार्टी
महाराणा क्रांति पार्टी के नाम शामिल हैं।

दरअसल इन पार्टियों ने चुनाव आयोग में पंजीकृत तो करा लिया है, लेकिन पिछले साल से किसी भी चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा है, और न ही कोई चुनाव लड़ा है। भारत में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन चुनाव आयोग करता है। इसमें टैक्स में छूट का भी फायदा मिलता है। चुनाव चिन्ह मिलने और राजनीतिक फायदा उठाने के लिए पार्टियाँ माध्यम बन जाती हैं।

जवाब प्रस्तुत करने 15 दिन की मोहलत…
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन सभी पार्टियों को 15 दिन की मोहलत दी है, और आयोग कार्यालय आकर जवाब देने के लिए कहा है। पार्टियों के अध्यक्ष, महासचिव या अन्य कोई भी पार्टी के प्रतिनिधि आयोग आकर जवाब दे सकते हैं। इन्हें ये बताना होगा कि 2019 के बाद 6 साल तक इन दलों ने किसी भी चुनाव में हिस्सा क्यों नहीं लिया? और अब तक धरातल पर क्या-क्या किया है, या इनकी क्या राजनैतिक गतिविधियां चल रही है। नोटिस में ये भी स्पष्ट कहा गया है कि यदि वक्त रहते इन पार्टियों के प्रतिनिधि आयोग के सामने प्रस्तुत होकर जवाब नहीं देते हैं, तो चुनाव आयोग इन पार्टियों को निष्क्रिय मानते हुए पंजीकृत राजनैतिक पार्टियों की सूची से हटा सकता है।

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