क्या यह अपना-अपना समर्थन जुटाने की कवायद है: विजय कुमार जयसिंघानी

एक तरफ प्रदेश की छोटी पंचायतें कह रही कि मंदिर भवन की धनराशि के लिए प्रादेशिक पंचायत उन्हें गोद ले, लेकिन प्रादेशिक पंचायत के द्वारा ही बड़े भवन आदि के लिए कोई बड़ा फैसला नही लिया तो अन्य छोटी पंचायत को क्या ही गोद लेंगे…?
लगातार 20 साल तक जो पंचायत प्रमुख बने रहे, उनका राजनैतिक रसूख भी था, तब भी उनके द्वारा बड़े भवन के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया गया, जबकि 15 साल की रमन सिंह सरकार के दौरान अग्रवाल समाज, जैन समाज सहित अन्य समाज के लिए एकड़ एकड़ भूमि सरकार द्वारा भूमि आंबटित की गई थी, तत्कालीन मुखिया से वो भी हो न सका…!
तमाम विरोधों के कारण समाज में आक्रोश पनपा तब चुनाव हुए और समाजजनों ने वर्तमान मुखिया को चुना…तमाम उतार चढ़ाव के साथ लगभग यह कार्यकाल पूर्णतया की ओर है, किंतु समाज की वो अपेक्षाएं पूरी नही हुई, जिसकी उम्मीद लगा कर बैठे थे…इसके उदाहरण दिए जाते हैं, जैसे कि अनुभव, और 20 साल की तुलना में तीन साल कम हैं, जिससे ऐसा लगता है कि भाई साहब भी बीस साल तक का रिकॉर्ड कायम करना चाहते हैं, करें मेरी शुभकामनाएं हैं, किंतु एक साल एक उपलब्धि के नाम तो रहे…? लेकिन तमाम बाहरी चुनोतियों के बावजूद अंदरूनी गुटबाजी कम नही हो रही है, बल्कि व्यापारिक संगठनों के आपसी विवाद और प्रतिस्पर्धा का दुष्प्रभाव का असर समाज के नीतिगत फैसलों में भी साफ दिखाई पड़ रहा है…!
चुनी हुई संस्था के सामांतर संस्था के गठन से समाज जनों में नाराजगी है, उसके बाद भी क्षेत्रीय मुखी सामांतर संस्था के मुखी सम्मेलन में शामिल हुए, जिसपर वर्तमान प्रदेश मुखी साहब ने नाराजगी जताई…मुखी साहब का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई संस्था ही असली संस्था है, और उसके सामांतर संस्था का गठन करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत आचरण है…लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए अध्यक्ष को सामांतर संस्था के सदस्यों ने अपने ट्रेप में ऐसा घेरा कि लोकतांत्रिक मुखी उन्हें नक्सली उपाधि देने के साथ ही अख़बारों में बयानबाजी कर दी, जिससे प्रदेशभर की सामाजिक पंचायतों में चर्चा तेज हो गई… पिछले सप्ताह एक नगर में हुए मुखी सम्मेलन के कारण स्थानीय मुखी को लोकतांत्रिक अध्यक्ष से केवल इसलिए फटकार सुननी पड़ी क्योंकि स्थानीय मुखी साहव ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर अपने नगर में उस सम्मेलन में पूरी तैयारियों के साथ सम्मिलित हुए थे…!
पिछले समाप्त एक मुखी सम्मेलन सम्पन्न हुआ था, आज फिर सम्मेलन है…2027 में फिर पंचायत चुनाव होना है, इन सबसे ऐसा प्रतीत नही होता है कि, ये सब अपना-अपना समर्थन जुटाने की कवायद है… जिसके लिए मंथन किया जा रहा है…?
बहरहाल समाज और संगठनों को मेरी ओर से अशेष शुभकामनाएं…!!!
विजय कुमार जयसिंघानी






