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स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने मरीज को इलाज कराने के बाद क्लेम देने से किया इंकार

NNH रायपुर/ स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने अपने पॉलिसीधारक को क्लेम देने से ही इंकार कर दिया है। यह मामला राजधानी रायपुर का है। जहां स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की पॉलिसीधारक एक महिला मरीज का कृष्णा छाबड़िया है, उन्होंने बताया कि वो पिछले 3 सालों से स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का प्रीमियम राशि नियमित रूप से जमा कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि, हाल ही में उनकी तबीयत खराब होने पर परिजन द्वारा उन्हें रायपुर के कमल विहार स्थित वेंकटेश हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, अस्पताल में भर्ती होने के बाद इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा कंपनी से कैशलेस सुविधा और बीमा सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन कंपनी द्वारा लगातार अलग-अलग बहाने बनाकर सहायता देने से ही इनकार किया गया।

जबकि कृष्णा छाबड़िया की पॉलिसी पूरी तरह चालू है, समय-समय पर सभी प्रीमियम जमा करती रही हैं। उनका कहना है कि स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अनुसार मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत ही नही थी, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, ऐसी स्थिति में उसे भर्ती करना आवश्यक था। बीमारी की गंभीर स्थिति में इस प्रकार का व्यवहार स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी द्वारा करना अत्यंत मानसिक, आर्थिक एवं भावनात्मक पीड़ा को बताता है। पॉलिसीधारक कृष्णा छाबड़िया ने पुलिस स्टेशन न्यू राजेंद्र नगर से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग करते न्याय दिलाने की मांग की हैं। साथ कहा है कि जिन लोगों ने भी स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी ली है वो दूसरी कंपनी में पोर्ट करा लें।

वहीं हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की लगातार ऐसी शिकायतें आ रही है कि मरीजों को इलाज के दौरान क्लेम नही दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को कंपनी के खिलाफ न्यायालय व उपभोक्ता आयोग की शरण में जाना चाहिए। हाल ही में पानीपत हरियाणा में बीमारी को शराब सेवन से जुड़ा बताते हुए बीमा कंपनी को क्लेम देने से इन्कार करना भारी पड़ गया। जहां जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे कंपनी की सेवा में कमी मानते हुए इलाज पर खर्च हुई एक लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा कि बिना किसी ठोस साक्ष्य के क्लेम खारिज करना अनुचित है।

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