
NNH रायपुर/ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर विकासखंड में पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के गबन को लेकर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 पूर्व सरपंचों को सिविल जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे पंचायत तंत्र में हड़कंप मच गया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि सरकारी राशि के दुरुपयोग और आदेशों की अवहेलना अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मिली जानकारी के मुताबिक, इन पूर्व सरपंचों पर अपने कार्यकाल के दौरान पंचायत निधि और शासकीय राशि के गबन का आरोप है। जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने संबंधित पूर्व जनप्रतिनिधियों को राशि वापस राजकोष में जमा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन बार-बार आदेश और नोटिस जारी होने के बावजूद राशि जमा नहीं की गई। इसके बाद एसडीएम न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी आरोपियों को 30 दिनों की सिविल जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया।
बताया जा रहा है कि प्रशासन ने पहले संबंधित पूर्व सरपंचों को मांग नोटिस जारी किया था। इसके बाद उनकी चल और अचल संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी की गई। जब्ती के दौरान करीब 20 लाख 30 हजार 627 रुपये की राशि का आकलन किया गया। बावजूद इसके, संबंधित आरोपियों ने राशि जमा करने में लगातार टालमटोल की। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कई आरोपियों के पास पर्याप्त संसाधन होने के बाद भी जानबूझकर आदेश की अवहेलना की गई।
मामले को गंभीर मानते हुए एसडीएम कोर्ट ने सभी पूर्व सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में पूछा गया था कि आखिर उन्हें जेल क्यों न भेजा जाए। लेकिन किसी भी आरोपी की ओर से संतोषजनक और वैधानिक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 18 मई को न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को 30 दिनों के लिए सिविल जेल भेजने या बकाया राशि जमा करने तक जेल में रखने का आदेश पारित कर दिया।
आदेश के पालन के लिए संबंधित थाना प्रभारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक को भी पत्र भेजकर आवश्यक तैयारी करने कहा गया है। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करने की बड़ी पहल माना जा रहा है।
जिन पूर्व सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें ग्राम घोंठ के सेवाराम यादव पर 1 लाख 96 हजार रुपये, कुर्रु के गोपाल ध्रुव पर 80 हजार रुपये, आलेखुंटा के गोपेश ध्रुव पर 50 हजार रुपये, खोला के तुलसीराम बारले पर 20 हजार 927 रुपये और परसुलीडीह के रामेश्वर प्रसाद डहरिया पर 5 लाख 90 हजार रुपये की राशि बकाया बताई गई है।
इसी तरह पचेड़ा के थनवार बारले पर 3 लाख 80 हजार रुपये, गोतियारडीह की सावित्री यादव पर 2 लाख 47 हजार रुपये, चंपारण के धर्मेंद्र यदु पर 30 हजार 700 रुपये, घुसेरा के राधेश्याम लहरी पर 80 हजार रुपये, भोथीडीह के तुकाराम कारले पर 2 लाख रुपये और तोरला के सेवेंद्र तारक पर 1 लाख 56 हजार रुपये की राशि जमा नहीं करने का आरोप है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि पंचायतों में बढ़ती वित्तीय अनियमितताओं पर सख्त संदेश भी है। अधिकारियों का मानना है कि कई पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जाता है, लेकिन अब ऐसे मामलों में सीधे जेल भेजने जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम अभनपुर ने स्पष्ट कहा है कि यदि संबंधित पूर्व सरपंच निर्धारित राशि तत्काल राजकोष में जमा कर देते हैं तो उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन आदेश की अनदेखी जारी रहने पर प्रशासन पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी धन जनता की संपत्ति है और उसके दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद पंचायत प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों के बीच भारी बेचैनी देखी जा रही है। कई पंचायतों में पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और खर्चों की समीक्षा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य पंचायतों में भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस पूरे मामले की जोरदार चर्चा है। कुछ लोग प्रशासन की कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे पंचायत राजनीति में बड़ा भूचाल मान रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि अभनपुर में हुई इस कार्रवाई ने पूरे जिले में एक बड़ा संदेश दे दिया है—सरकारी राशि के गबन पर अब सीधी जेल होगी।







