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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने किस आधार पर भोजशाला को मंदिर माना

नमाज पढ़ने की अनुमति को भी किया रद्द

NNH इंदौर/ धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष की मांग को स्वीकार कर लिया, और इस फैसले के बाद वर्षों से चल रहे विवाद पर नई बहस शुरू हो गई है। हिंदू पक्ष ने इसे आस्था और ऐतिहासिक तथ्यों की जीत बताया है, जबकि इस निर्णय के राजनीतिक और सामाजिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

क्या हैं ऐतिहासिक तथ्य

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को लेकर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने इसे वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर माना है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्य, एएसआई सर्वे और अयोध्या फैसला को आधार बनाकर यह निष्कर्ष निकाला गया है।

फैसले में एएसआई की रिपोर्ट सबसे अहम रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को आधार मानकर ही कोर्ट ने भोजशाला विवाद को मंदिर करार दिया है। बता दें कि फैसले में अहम कड़ी बनकर सामने आई रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के वो 188 मूल आधार स्तंभ जिनमें 106 मुख्य स्तंभ और 82 अर्धस्तंभों फैसले का मुख्य आधार बने, जिन पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक, देवी-देवताओं की आकृतियां और मंदिर शैली की नक्काशी मिलने का दावा किया गया। इन्हीं तथ्यों को आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया।मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में ASI की 2024 सर्वे रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट के अनुसार परिसर में कुल 106 मुख्य स्तंभ और 82 अर्धस्तंभ मौजूद हैं। इनमें से कई स्तंभों पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक चिन्ह, देवी-देवताओं की आकृतियां और पारंपरिक मंदिर शैली की नक्काशी पाई गई।

कोर्ट ने 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं को पूजा और मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति से जुड़े प्रावधान थे। साथ ही केंद्र सरकार और एएसआई को मंदिर के प्रबंधन पर निर्णय लेने को कहा है। मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है, फिलहाल परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, और प्रशासन पूरी तरह से एलर्ट पर है।

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