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दरगाह के अंदर होगी महाशिवरात्रि की पूजा

पूजा अर्चना पर रोक लगाने वाली दरगाह कमेटी की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

NNH नई दिल्ली/ बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को बड़ी राहत देते हुए एक दरगाह परिसर में स्थित शिवलिंग की पूजा की अनुमति दे दी है। अगले दिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी पूजा रोकने वाली याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह पूरा मामला कर्नाटक के कलबुर्गी जिले अलांद दरगाह का है। कर्नाटक के अलांद में स्थित एक दरगाह में हिंदू संगठनों द्वारा पूजा-अर्चना और शिवरात्रि समारोह को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने उस याचिका पर विचार करने से मना कर दिया है जिसमें पूजा की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

दरगाह कमेटी की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उस रिट याचिका को सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें हिंदू धर्म से संबंधित अनुष्ठानों की अनुमति देने वाले न्यायिक आदेशों को चुनौती दी गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में अनुच्छेद 32 (Article 32) का सहारा नहीं लिया जा सकता। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि यदि हर ऐसे मामले सुनवाई के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में होने लगेंगे तो यह संदेश जाएगा कि देश के हाई कोर्ट अप्रासंगिक हो गए हैं। और सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा दी गई पूजा की अनुमति फिलहाल प्रभावी बनी रहेगी।

दरगाह कमेटी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि अंतरिम आदेशों के जरिए धार्मिक स्थलों का स्वरूप बदलने का एक सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। विवाद का केंद्र 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ा स्थल है। दोनों संतों के अवशेष इसी परिसर में बताए जाते हैं। यहीं राघव चैतन्य शिवलिंग नामक एक संरचना भी मौजूद है।

दरअसल कर्नाटक के ​कलबुर्गी जिले के अलांद की दरगाह में हर साल उर्स और शिवरात्रि के समय विवाद की स्थिति बनती है। हिंदू पक्ष वहां राघ चैतन्य शिवलिंग का दावा करता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे शुद्ध रूप से सूफी संत की दरगाह मानता है। बताया जा रहा है कि पहले इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग पूजा-अर्चना करते थे। हालांकि, 2022 में पूजा अधिकार को लेकर तनाव बढ़ गया था, जब कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से कथित तौर पर शिवलिंग को अपवित्र करने की घटना सामने आई थी। फरवरी, 2025 में भी हाई कोर्ट ने 15 हिंदू श्रद्धालुओं को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी। इस दौरान शांतिपूर्ण ढंग से पूजा अर्चना संपन्न हुई थीं। इस साल भी अदालत ने पूर्व आदेश की तर्ज पर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति प्रदान की है। पिछले आदेशों में प्रशासन ने भी दोनों पक्षों को तय समय पर अपने-अपने अनुष्ठान करने की अनुमति दी थी।

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