बांग्लादेश के आम चुनावों में बीएनपी की बड़ी जीत, तारिक रहमान की 17 साल बाद हुई धमाकेदार वापसी
अल्पसंख्यक हिंदू मतदाताओं ने निभाई बड़ी भूमिका

NNH-Bangladesh Election/ बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव के बाद अब नतीजे सामने आ रहे हैं। जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बड़ी जीत मिली है। पार्टी नेता तारिक रहमान ने जिन दो सीटों से चुनाव लड़ा था, दोनों पर उन्होंने शानदार जीत दर्ज की है। बताया जा रहा है कि इस आम चुनावों में बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू मतदाताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनके समर्थन से ही बीएनपी ने ये बड़ी जीत हासिल की है।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया था। अंतरिम व्यवस्था और यूनुस सरकार के दौर में कई इलाकों से मंदिरों पर हमले, हिंदूओं के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की बड़ी घटनाएं हुईं। हिंदुओं के पलायन की आशंका जैसी खबरों ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया था। जिसके बाद बांग्लादेश में यूनुस सरकार में हिंदू-अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और असुरक्षा की चर्चाएं को लेकर सवाल उठने लगे थे।
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के दावेदार तारिक रहमान ने दो महत्वपूर्ण सीटों ढाका-17 और बोगरा-6 से अनौपचारिक रूप से जीत दर्ज कर ली है। 17 साल के बांग्लादेश वापस लौटने के बाद तारिक रहमान के लिए यह जीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बार के आम चुनावों में मुकाबला मुख्य रूस से तारीक की बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच था। देर रात तक वोटों की गिनती जारी रही, और शुरुआती रुझानों में ही बीएनपी बढ़त बनाए हुए थी।
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएनपी ने कुल 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दलों को सिर्फ 70 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। वहीं देशभर के 36 हजार मतदान केंद्रों पर कुल 47.91 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई।
तारिक़ रहमान ने पहली बार संसदीय चुनाव में बांग्लादेश के प्रमुख राजनीतिक दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने ख़ुद भी पहली बार इस चुनाव में हिस्सा लिया। तारिक़ के नेतृत्व में बीएनपी ऐतिहासिक जीत हुई है। इस जीत के बाद तारिक़ रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
हालांकि बीएनपी तब जीत की ओर बढ़ रही है, जब शेख़ हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव में हिस्सा नहीं लेने दिया गया। तो वहीं चुनाव से महज़ कुछ महीने पहले ही अपनी माँ ख़ालिदा ज़िया के निधन के बाद तारिक़ ने पार्टी की कमान संभाली थी। पार्टी के सांगठनिक कार्यक्रम और पूरा चुनाव अभियान उनकी देख-रेख में ही संचालित किया गया था। तारिक़ के समर्थक उनको ही बांग्लादेश का संभावित प्रधानमंत्री बता रहे हैं।






