NNH खबर विशेष/ छत्तीसगढ़ में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री विष्णदेव साय को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।
सूरजपुर जिले के वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में शामिल होने के लिए जाते हुए हादसे का शिकार हो गए थे। उसी सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद से वे स्थायी विकलांगता और आर्थिक बदहाली का शिकार हो गए हैं। जिसके बाद उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन से उपेक्षा मिलने से भी मैं व्यथित हैं।
मिली जानकारी के अनुसार विशंभर यादव का परिवार शुरू से ही संघ-भाजपा से जुड़ा रहा है। उनके पिताजी आरएसएस के स्वयंसेवक थे। विशंभर और उनकी पत्नी भी भाजपा में सक्रिय रहे हैं। दो साल पहले उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम के लिए कार्यकर्ताओं को ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। बेमेतरा के समीप उनकी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें विशंभर यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना पर प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से सहानुभूति व्यक्त की थी और उस समय के छत्तीसगढ़ के सभी बड़े नेताओं ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था। दुर्घटना के बाद संगठन की तरफ से उन्हें अपोलो से एम्स दिल्ली तक एयर एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन उसके बाद उनका हालचाल लेने वाला कोई नहीं रहा।
बताया जा रहा है कि इस हादसे के बाद विशंभर यादव के इलाज में 30-35 लाख रुपये खर्च हो गए हैं, जिससे परिवार आर्थिक रूप से बदहाल हो गया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। पिछले दो वर्षों से उनका परिवार इलाज का खर्च उठा रहा है, जिसमें अब तक 30 से 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी इलाज में लगा दी है, और अब उनके पास कुछ नहीं बचा है। घर की आर्थिक स्थिति और अपनी शारीरिक लाचारी से मजबूर होकर विशंभर यादव ने मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की मांग की है।
“जिस पार्टी के लिए जीवन दिया, उसने छोड़ दिया”
विशंभर यादव ने दर्द बयां करते हुए कहा कि, “मैं शरीर से इतना मजबूर हो गया हूं और मेरे कारण मेरा परिवार भी परेशान है। जिस पार्टी के लिए मैंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, वहां से भी कोई सहयोग नहीं मिला। अब मेरे पास मौत के सिवा कुछ नहीं बचा है, इसलिए मैंने इच्छा मृत्यु की मांग की है।” उन्होंने यह भी कहा, “भाजपा अब पहले जैसी नहीं रही, पहले कार्यकर्ताओं का सम्मान होता था। मेरा तो कोई हालचाल भी नहीं लेना चाहता। अगर संगठन मेरा सहयोग करता तो बहुत अच्छा होता।







