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शराब घोटाले से जुड़े पूर्व आबकारी आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त जमानत

NNH नई दिल्ली/ सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब नीति घोटाले से जुड़े मामलों में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले के अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं और मुकदमे के निष्कर्ष तक पहुंचने में अभी लंबा समय लग सकता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मुख्य घोटाले से जुड़े दो अलग-अलग मामलों और संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। इससे पहले मामले में अनिल टुटेजा और एपी त्रिपाठी को भी जमानत मिल चुकी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निरंजन दास को इस पूरे मामले का कथित मुख्य सूत्रधार बताया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में ऐसी भूमिका निभाई, जिससे अन्य सह-आरोपियों को लाभ पहुंचाया जा सके।

हालांकि अदालत ने यह भी माना कि दास को दो अलग-अलग मामलों में 18 सितंबर 2025 और 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और लंबे समय से वे न्यायिक हिरासत में हैं। इसी आधार पर उन्हें जमानत देने का फैसला लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने दास पर वही शर्तें लागू की हैं, जो अन्य सह-आरोपियों पर लागू हैं। इसके तहत उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और केवल जांच या अदालत में पेशी के लिए ही राज्य में आने की अनुमति होगी। हालांकि अदालत ने भविष्य में जमानत शर्तों में ढील देने के लिए आवेदन करने की छूट भी दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले एक मार्च में हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया को भी शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दी थी।

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