वर्तमान प्लेसमेंट एजेंसी में ओवररेट शराब बेचने वाले ब्लैकलिस्टेड कर्मचारी भी हैं शामिल, क्या आबकारी विभाग एजेंसी बदलने के साथ ही करेगा बड़ा बदलाव…?

NNH रायपुर/ शराब बिक्री के लिए प्लेसमेंट कंपनी बदलने के साथ ही अब विभाग पुराने कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी में है..? ये बड़ा सवाल सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि विभाग ऐसे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के मूड में है जो काफी समय से एक ही दुकान में जमे हुए हैं। और पुरानी प्लेसमेंट कंपनी में इन कर्मचारियों ने फील्ड अफसरों के साथ तालमेल बिठाकर कई तरीकों से वारे न्यारे किए थे। इनमें कई चेहरे ऐसे हैं जो कंपनी के बड़े जवाबदारों के प्रभाव में आकर किसी न किसी तरीके से एंट्री ली है।
सूत्रों के मुताबिक सीएसएमसीएल द्वारा व्यवस्था बदलने अब खाका तैयार किया जा रहा है। कंपनी ने दुकानों के लिए सुपरवाइजर के अलावा फील्ड अफसर नियुक्त किए थे, लेकिन विभाग ने पहले ही ये साफ कर दिया था कि, दुकानों का संचालन सिर्फ फिल्ड अफसर करेंगे। बाकी बनाई गई नई व्यवस्था में फिल्ड मैनेजर, फिल्ड अफसर और ऑडिट के लिए दूसरे अन्य जवाबदारों की नियुक्ति नहीं की जाएगी।
बताया जा रहा है कि पुरानी प्लेसमेंट कंपनी में बिहार के एक गुट का दबदबा रहता था। उस गुट से आने वाले कर्मचारियों ने किसी तरह एंट्री लेकर बकायदा दुकानों का बंटवारा किया था। अपने-अपने सुपरवाइजर बिठाकर दुकानों में वारे न्यारे किए थे। प्लेसमेंट से काम लेकर अपने हिसाब से दुकानों में बिक्री का सिस्टम बिठाया जाता था। इसके बाद ओवर रेट से लेकर कोचियों का चेनल बनाने तक भूमिका तय की गई थी। तब नई आबकारी नीति बनने के बाद प्लेसमेंट के लिए भी विभाग अलग से नियम तय किए थे।
पुरानी प्लेसमेंट कंपनी ने भले ही दुकानों में बिक्री के दौरान गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ ऊपरी कार्रवाई कर प्रकरणों का निपटारा किया था, लेकिन असल में जिन कर्मचारियों को ब्लेक लिस्टेड किया गया था, वो कई चेहरे अभी भी दुकानों में जमे हुए हैं। कुछ पर्दे के पीछे से भी कई कर्मचारियों ने दुकानों में अपना प्रभाव जमा रखा है। वर्तमान प्लेसमेंट एजेंसी में जो ब्लैकलिस्टेड कर्मचारी हैं, उन लोगों ने दस्तावेजों में बदलाव और बड़ा खेला कर ब्लेक लिस्टेड होने के बाद भी फिर से दुकानों में जम गए हैं।
2023 में सरकार बदलने के बाद रायपुर जिले को एक नंबर जोन में रखा गया था। और यहां बीआईएस (बांबे इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड) कंपनी को टेंडर मिला था, जिसमें पूरे जिले की दुकानों को संचालित करने के लिए सैकड़ों कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। लेकिन वर्तमान में ऐसे कर्मचारी भी जमे हुए हैं जो पहले ही ब्लैक लिस्टेड हो चुके थे। और पुरानी प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों के विरूद्ध सामने आई शिकायतों के आधार पर नई प्लेसमेंट एजेंसी के लिए कई नियम तय किए गए थे। लेकिन वर्तमान प्लेसमेंट एजेंसी में भी पुराने ब्लैकलिस्टेड कर्मचारी शामिल हो गए हैं, और वो जमकर ओवररेट में तो शराब बेच ही रहे हैं, इसके अलावा बेखौफ होकर कोचियों को भी अवैध शराब बिक्री के लिए बड़ी मात्रा में शराब उपलब्ध करा रहे हैं।
जबकि नई प्लेसमेंट एजेंसी को टेंडर मिलने के बाद आबकारी विभाग द्वारा ये तय कर लिया गया था कि ब्लेक लिस्टेड कर्मचारियों की छंटनी कर उन सभी को बाहर करेंगे। लेकिन पुराने ब्लैक लिस्टेड कर्मचारी पूरे जिले भर की दुकानों में जमे हुए हैं। वहीं जिन दुकानों में ओवररेट और कोचियों को शराब दी जा रही है, उनमें औद्योगिक क्षेत्र उरला की देशी शराब दुकान, सिलतरा, मांढर, रायपुर के सड्डू, मोवा, शहर के एमजी रोड, फाफडीह, पुराना बस स्टैंड, भाठागांव, राजेंद्र नगर अमलीडीह, माना बनारसी, अभनपुर उरला, नवापारा, लखौली, आरंग सहित जिले की अधिकतर दुकानों पर ओवररेट शराब बेचने के साथ ही अवैध शराब बिक्री के लिए कोचियों को भी बड़ी मात्रा में शराब उपलब्ध कराई जा रही है। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग इसपर क्या बदलाव करता है।







