क्रांति सेना के नेता द्वारा समाज के प्रति अभद्र भाषा का उपयोग करने से भड़का उड़िया समुदाय, धमकी देने वाले व्यक्ति के विरुद्ध एसपी को सौंपा ज्ञापन

NNH रायपुर/ उड़िया समुदाय के विरुद्ध अभद्र भाषा का उपयोग और धमकी के सम्बंध आज सामाजिक न्याय कार्यकर्ता अधिवक्ता भगवानू नायक के अगुवाई में अधिवक्ता विवेक तनवानी, अधिवक्ता उर्वशी घोष पाल, अधिवक्ता आनंद मुग्री, अधिवक्ता, दीपिका बघेल, अधिवक्ता पारस नायक, अधिवक्ता प्रीति साहू, अधिवक्ता सुमन साहू, अधिवक्ता कुमकुम सोनी, सामाजिक नेता संजय कुंभार, अजीत कुम्भार, जितेंद्र नायक, मनसु निहाल, बिट्टू क्षत्री आदि का एक प्रतिनिधि मण्डल ने रायपुर एसपी लाल उम्मेद सिंह से भेंटकर शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया। अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा विगत दिनों की एक अत्यंत निंदनीय एवं भड़काऊ घटना सामने आई है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो के अनुसार, “छत्तीसगढ़ क्रांति सेना” नामक संगठन के एक तथाकथित नेता द्वारा रायपुर स्थित एक मॉल में जाकर, वहाँ तैनात एक सुरक्षा गार्ड (जो उड़िया समुदाय से है) के साथ धमकी भरा एवं अभद्र व्यवहार किया गया है। उक्त व्यक्ति द्वारा चिल्ला-चिल्लाकर गार्ड को धमकाया गया, उसके साथ मारपीट की धमकी (“पटक-पटक कर मारेंगे”) दी गई तथा समस्त यूपी, बिहार एवं ओडिशा के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले एवं हिंसा को उकसाने वाले बयान दिए गए। उसने गुंडागर्दी भरी भाषा का इस्तेमाल करते हुए छत्तीसगढ़ की सरकार को भी “दोगला सरकार” जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया है। साथ ही, उसने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने की धमकी भी दी। यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे हमारे शहर, राज्य की शांति-व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कहा इस घटना से, विशेष रूप से गरीब एवं मेहनतकश उड़िया समुदाय के लोगों में गहरा रोष, भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। छत्तीसगढ़ी और उड़िया समुदाय का रिश्ता और नाता सदियों पुराना, सांस्कृतिक और भाईचारे का है। दोनों की संस्कृति, खान-पान और रहन-सहन में अद्भुत समानता है। ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में लाखों छत्तीसगढ़िया मूल के लोग रहते हैं, जहां पर कभी क्षेत्रीयता की बात नहीं उठी है प्रेम और सद्भाव सदियों से क़ायम है। वहीं छत्तीसगढ़ के सरायपाली, बसना, देवभोग, महासमुंद, रायगढ़, रायपुर, दुर्ग आदि जिलों में उड़िया समुदाय के लोग आज़ादी के पहले से पीढ़ियों से शांति और सौहार्द के साथ रह रहे हैं और यहाँ की संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। इन दोनों संस्कृतियों का मेल ऐसा है जैसे चाय में शक्कर है जिसमें नफ़रत का ज़हर घोल कर अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा उक्त व्यक्ति एवं उसके साथियों द्वारा की गई यह कार्रवाई “शांति के टापू” कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की शांतिपूर्ण सामाजिक फिज़ा में जहर घोलने का एक सोचा-समझा प्रयास प्रतीत होता है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति के डराने-धमकाने तक सीमित है, बल्कि पूरे दबे, कुचले गरीब उड़िया समुदाय के विरुद्ध घृणा फैलाने और सामाजिक सौहार्द को ख़राब करने का अपराध है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के प्रति भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था और अब समाज के एक गरीब और साधारण एक गरीब गार्ड को निशाना बनाया किया जाकर समाज में भय बनाया जा रहा है।
उन्होंने उक्त अज्ञात व्यक्ति की पहचान करके उसकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS), सायबर अपराध, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कड़े से कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है। प्रतिनिधि मण्डल को सुनकर एसपी ने उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता मोनू आहूजा ने भी कहा कि सिंधी समाज के खिलाफ भी क्रांतिसेना द्वारा लगातार अनर्गल टिपणियां की जा रही है, और समाज को पाकिस्तानी कहकर अपमानित किया जाता रहा है, पर अफसोस सिंधी समाज के प्रमुख मुखीजन अबतक इसपर कोई ठोस कदम नही उठाया गया है। इसके खिलाफ सिंधी समाज प्रमुखों को आगे आकर शासन प्रशासन से कार्यवाही की मांग करनी चाहिए।







