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छत्तीसगढ़ सरकार ने अधूरे स्काई वॉक के निर्माण के लिए किए 37 करोड़ मंजूर

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: कांग्रेस ने कहा स्काईवॉक का भूत रायपुर शहर का पीछा नहीं छोड़ रहा, तो बीजेपी ने कहा कांग्रेस का भूत जनता ने उतार दिया

NNH रायपुर/ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जयस्तंभ चौक से शुरू होते हुए शास्त्री चौक, घड़ी चौक और जिला न्यायालय, जेल रोड अम्बेडकर हॉस्पिटल तक भाजपा की डॉ रमन सिंह सरकार ने 2017 में स्काईवॉक बनाने का काम शुरू किया था। लेकिन 2018 में सरकार बदली, और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने इसे गैर जरूरी बताते हुए इसके काम को रोक दिया, और अपने विधायकों की एक कमेटी बना दी, जिस कमेटी को स्काई वॉक की रिपोर्ट सौंपनी थी, उसने पांच साल कोई रिपोर्ट ही नही सौंपी।

2023 में फिर सरकार बदली और इस बार राज्य की भाजपा सरकार ने पिछले आठ सालों से अधूरे पड़े स्काई वॉक का काम पूरा करने के लिए रायपुर की कंपनी पीएसएस कंस्ट्रक्शन को ठेका दिया है, और विष्णुदेव सरकार ने इसके लिए 37.75 करोड़ रुपए मंजूर कर इसका काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं।करीब डेढ़ किलोमीटर में बनने वाले स्काई वॉक में 12 जगह चढ़ने-उतरने के लिए नए एस्कलेटर लगाए जाएंगे। और इसके साथ ही सीढ़ियां भी बनाई जाएंगी।

स्काई वॉक के काम को मंजूरी मिलने के बाद लोगों की अब प्रतिक्रिया सामने आ रही है। एक तरफ भाजपा के नेता, विशेषकर पूर्व मंत्री और रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत के समर्थक इसके लिए मूणत को बधाई देते हुए उनकी बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर शहर के प्रबुद्ध वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता व आम लोग इसके उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसपर लोगों का कहना है कि जहां फ्लाई ओवर की आवश्यकता है, वहां पैदल चलने के लिए इतने ऊपर स्काई वॉक पर कौन चढ़ेगा, कुछ लोगों ने इसे पैसे की बर्बादी कहा है, तो कुछ लोगों का मानना है कि पूरा बनने के बाद ही इसकी उपयोगिता समझ आएगी अभी से इसपर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, तो कुछ लोगों ने इसे पैदल चलने वालों के लिए फायदे गिनाए हैं।

वहीं इस अधूरे निर्माण के लिए राशि की मंजूरी मिलते ही भाजपा-कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के x अकाउंट पर एक पोस्ट की गई है जिसमें स्काई वॉक के निर्माण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। उसमें लिखा गया है कि…

“स्काईवॉक का भूत रायपुर शहर का पीछा नहीं छोड़ रहा है, पता नहीं भाजपा इस फ्लॉप प्रोजेक्ट को पूरा कर किसका अहंकार बचाना चाह रही है, फिलहाल तो जनता की मेहनत के और ₹37 करोड़ रुपए स्वाहा होते नज़र आ रहें हैं।”

कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया के बाद तो भाजपा कहां पीछे रहने वाली थी, सोशल मीडिया पर बीजेपी के x अकाउंट से इसका जवाब देते हुए लिखा गया कि…

“तुम्हारी विकास विरोधी सरकार के भूत को तो जनता ने उतार दिया है। अमूमन सत्ता परिवर्तन होने का बाद नयी सरकार पूर्ववर्ती सरकार के विकास कार्य को पूर्ण करती है लेकिन विकास विरोधी कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद छत्तीसगढ़ के शहरी विकास पर ताला ही लगा दिया था। रायपुर के स्काईवॉक को रोकना भी उसी हीन भावना का परिचय था। लेकिन अब स्काईवॉक भी बनेगा और अटल नगर नवा रायपुर का विकास भी होगा और तुम लोग ईर्ष्या में सरकार को कोसते ही रह जाओगे।”

स्काई वॉक का नामकरण भी हो गया

ये तो हुई राजनैतिक दलों की क्रिया-प्रतिक्रिया, लेकिन स्काई वॉक को लेकर काफी सारे लोगों के सोशल मीडिया पर पोस्ट कमेंट आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले देवेंद्र गुप्ता ने अपने फेसबुक पेज पर स्काई वॉक की फोटो शेयर कर एक पोस्ट में स्काई वॉक का नामकरण ही कर दिया है। देवेंद्र ने लिखा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पीडब्ल्यूडी विभाग के मंत्री उपमुख्यमंत्री अरुण साव जी,सांसद बृजमोहन अग्रवाल जी,विधायक पुरंदर मिश्रा जी, मोतीलाल साहू जी, महापौर मीनल चौबे जी से मेरा विनम्र आग्रह है कि रायपुर शहर के हृदय में कांटो की तरह चुभ रहे इस निर्माणाधीन स्काई वॉक का नामकरण आदरणीय “राजेश मूणत स्काई वॉक” रखा जाए! ताकि लोगों को पता भी तो चले कि यह सिर्फ और सिर्फ उनकी ही जिद का परिणाम है!
रायपुर वासियों को यह भी समझ में आना चाहिए कि अन्य महानगरों की तरह अपने शहर के मध्य से चारों दिशाओं से गुजरता हुआ फ्लाई ओवर अगर नहीं बन पा रहा है उसका कारण भी यह स्काई वॉक ही होगा!
हेश टैग #राजेश_मूणत_स्काई_वॉक

कुल मिलाकर तमाम विरोध के बावजूद 2017 में शुरू हुआ स्काई वॉक गले की फांस बनकर रह गया है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में इसपर एक ईंट तक नही लगी तो अब भाजपा की सरकार बनने के लगभग डेढ़ साल बाद विष्णुदेव सरकार ने स्काई वॉक के लिए लिए 37 करोड़ मंजूर कर जल्द काम शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं, तो इसपर बड़ी बहस भी छिड़ गई है। अब ये तो स्काई वॉक निर्माण पूर्ण होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह जनता के लिए कितना उपयोगी सिद्ध होगा।

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