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ग्यारह करोड़ का सर्पदंश घोटाला

47 लोगों को मृत घोषित कर 280 बार सरकार से 4-4 लाख रुपए की ली गई मुआवजा राशि

NNH जबलपुर/ मध्य प्रदेश में सर्पदंश घोटाला सामने आया है, जिसका सच सामने आते ही जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।ये पूरा मामला एमपी के सिवनी जिले का है, जहां 47 लोगों ने ये झूठ बोला कि उन्हें सांप ने कांटा है। किसी को सांप ने काटा, किसी को बिजली गिरी, तो किसी को पानी में डूबा बताया गया है। और ऐसे में इन 47 लोगों को करीब 280 बार मृत घोषित करके सरकार से बार-बार 4-4 लाख रुपए की राशि ली गई, जिसमें कुल 11 करोड़ 26 लाख का घोटाला किया गया है। इस जिले में रहने वाली रानी नाम की एक महिला ने खुद सांप से काटने का झूठ बोलकर खुद को 29 बार मृत दिखाया, जिसके चलते हर बार उसे 4 लाख रुपये प्राकृतिक आपदा में गई जान गवाने का झूठ बोलकर रानी को सरकार से कुल 1 करोड़ 16 लाख रुपये का मुआवजा मिला है।

वहीं, इसी गांव में रहने वाले राजू ने भी रानी की तरह ही झूठ बोलकर खुद को 28 बार सांप के काटने का झूठ बोला, और ऐसा करके उसने भी हर बार सरकार से 4-4 लाख मुआवजा राशि हासिल की। इस मामले में हैरानी की बात ये है कि केवल राजू और रानी ने ही ऐसा नहीं किया बल्कि इस गांव के करीब 47 लोगों ने करीब 280 बार खुदको मृत दिखाकर सरकार से 4-4 लाख रुपये की प्राकृतिक आपदा राहत राशि हासिल कर ली। और ऐसा करके कुल संख्या 11 करोड़ 26 लाख रुपये मुआवजा राशि का घोटाला किया गया है।

कोष एवं लेखा विभाग के जांच अधिकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के सिवनी में प्राकृतिक आपदा के तहत दी जाने वाली राहत राशि की जब जांच की गई तब जो सच सामने आया इसके बाद सभी जांच अधिकारी हैरान रह गए। क्योंकि जांच में जब पता चला कि एक ही इंसान के नाम वाले लोगों को एक ही तरह सांप ने काटा और ऐसे ही करीब 47 लोग थे जिनके नाम कई बार सांप से काटने वाले लोगों की सूची में दिखाई दिए।

बता दें कि ये पैसों को गबन करने का ये मामला कमलनाथ सरकार के समय साल 2019 से शुरू हुआ और शिवराज सिंह की सरकार साल 2022 तक ये घोटाला चलता रहा। जिसका खुलासा राजस्व विभाग के ऑडिट में हुआ।

इस घोटाले की जांच में मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में 47 लोगों को कागज़ों पर 280 बार मरा हुआ दिखाया गया था। एक महिला को 29 बार सांप ने काटा, एक पुरुष को 28 बार मरा दिखाया गया, तो किसी-किसी को 38 बार तक मरा घोषित किया गया। और हर बार उनके परिजनों को 4-4 लाख रुपये “प्राकृतिक आपदा राहत कोष” से दिए गए। इस पूरे घोटाले की रकम 11 करोड़ 26 लाख रुपये बताई गई है। जांच में सामने आया है कि तहसील के क्लर्क ने फर्जीवाड़ा कर ये पैसे अपने रिश्तेदारों के खातों में डलवाए।अब तक 21 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और आरोपी क्लर्क को बर्खास्त कर दिया गया है।

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