कुत्ते इंसानी डर पहचानते हैं, इसलिए वो काटते हैं
कुत्तों के पक्ष में कपिल सिब्बल की दलील पर जज ने कहा आप भाग्यशाली हैं

NNH नई दिल्ली/आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दूसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कुत्तों के व्यवहार और आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं और ऐसे में लोगों पर हमला करने की संभावना ज्यादा होती है। इस पर एक वकील ने आपत्ति जताई, तो जस्टिस नाथ ने साफ कहा कि यह उनका व्यक्तिगत अनुभव है।
कोर्ट में एनिमल वेलफेयर की ओर से कुत्तों को हटाने या शेल्टर होम भेजने का विरोध किया गया। दलील दी गई कि कुत्तों को हटाने से चूहों की संख्या बढ़ेगी, जिस पर कोर्ट ने व्यंग्य में पूछा—तो क्या बिल्लियां ले आएं? कोर्ट ने दोहराया कि स्कूल, अस्पताल, कोर्ट, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में आवारा कुत्तों की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ऐसे स्थानों से कुत्तों को हटाकर तय शेल्टर में भेजने का आदेश दे चुका है।
इस मामले में बीते 7 महीनों में पांच बार सुनवाई हो चुकी है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि मानव सुरक्षा सर्वोपरि है और एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को सही ढंग से लागू करना राज्यों की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कुत्तों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार का मुद्दा उठाया, मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी, उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इससे कुत्तों की आबादी लगभग शून्य तक आ गई है, ऐसे कुत्ते जिन्हें रेबीज है और जिन्हें नहीं है, एक ही शेल्टर में रखे जाएं तो सभी को रेबीज हो जाएगा। सिब्बल ने दलील देते हुए कहा कि जब भी मैं मंदिरों आदि में गया हूं, मुझे कभी किसी कुत्ते ने नहीं काटा। कपिल सिब्बल की यह बात सुनते ही सुप्रीम कोर्ट के जज ने सिब्बल को टोकते हुए कहा कि आप भाग्यशाली हैं, लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है।
बहस के दौरान सिब्बल ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर नहीं होते हैं बल्कि परिसरों में रहते हैं। इसी दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल पर नाराजगी जताई, और कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि क्या आप सच कह रहे हैं? आपकी जानकारी पुरानी लगती है। बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है। सड़कों को कुत्तों से साफ और खाली रखना होगा। हो सकता है वे काटें नहीं, लेकिन फिर भी वे हादसों की वजह बनते हैं।
वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ लोग कुत्तों के लिए और कुछ इंसानों के लिए पेश हो रहे हैं।







