
बिलासपुर/ मंगलवार को जिले के तखतपुर से बड़ी खबर सामने आई, जहां निलंबित पटवारी सुरेश मिश्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार उन्होंने अपनी बहन के फार्महाउस में रस्सी का फंदा बनाकर खुदकुशी की है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची है। मृतक पटवारी सुरेश मिश्रा ग्राम पंचायत भाड़म में पदस्थ थे। आत्महत्या के तीन दिन पहले ही भारतमाला प्रोजेक्ट में गड़बड़ी को लेकर एसडीएम ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
जानकारी के अनुसार, पटवारी सुरेश मिश्रा 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह आत्मघाती कदम उठाकर उन्होंने सबको हैरान कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई पूरी की। इसके बाद सुरेश मिश्रा का शव पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भेजा गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और आत्महत्या के पीछे की असल वजह की जांच की जा रही है।
बता दें कि भारतमाला परियोजना में ज़मीन अधिग्रहण में हुए भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित किए गए पटवारी सुरेश मिश्रा ने मंगलवार देर शाम तखतपुर में अपनी बहन के फार्म हाउस में फांसी लगाकर जान दे दी थी, जहां से पुलिस को चार पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें सुरेश ने खुद को निर्दोष बताया है और उच्च अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने बताया कि आत्महत्या का कारण प्रथम दृष्टया मानसिक अवसाद माना जा रहा है, लेकिन सुसाइड नोट में किए गए खुलासे जांच की दिशा को बदल सकते हैं।
सुसाइड नोट में क्या लिखा है…?
सुरेश मिश्रा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है: “मैंने कोई गड़बड़ी नहीं की मैं निर्दोष हूँ, मुझे झूठा फंसाया जा रहा है। जिन लोगों ने करोड़ों का घोटाला किया, वे आज भी कुर्सी पर बैठे हैं। मेरी मौत के बाद भी अगर जांच निष्पक्ष नहीं हुई, तो ये सिस्टम कभी नहीं सुधरेगा।”
पुलिस मामले की जांच कर रही है, और सुसाइड नोट को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। वहीं जिला प्रशासन ने इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट 15 दिनों में प्रस्तुत करने को कहा गया है। वहीं, आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी सुरेश के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अफसरों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है।
भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि में मुआवजा वितरण को लेकर हुए घोटाले में सुरेश मिश्रा का नाम सामने आया था। बीते दिनों लोकायुक्त की प्राथमिक जांच के बाद उन पर धोखाधड़ी और रिकॉर्ड में हेरफेर का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद उन्हें राजस्व विभाग ने निलंबित कर दिया था।
24 को निलंबित और 25 जून को दर्ज हुई थी एफआईआर…
25 जून को तत्कालीन तहसीलदार डीआर उइके और तत्कालीन पटवारी सुरेश कुमार मिश्रा के खिलाफ भारतमाला परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 ए (बिलासपुर-उरगा) मुख्य सड़क के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजे की गणना में कथित रूप से अनियमितता करने के आरोप में तोरवा थाने में मामला दर्ज हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) बिलासपुर और जिला स्तरीय समिति ने पूरे मामले की जांच की थी, इसके बाद वर्तमान तहसीलदार की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई. जांच से पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी और भूमि के अवैध हस्तांतरण/विभाजन के कारण अतिरिक्त मुआवजा की गणना की गई, जिससे सरकारी खजाने को आर्थिक क्षति होती। अधिकारियों ने बताया कि प्रकरण पंचाट (आर्बिटेटर) में लंबित होने के कारण मुआवजा वितरित नहीं हो पाया है और सड़क निर्माण कार्य बाधित है, जिसके कारण आम लोग सड़क सुविधा से वंचित हो रहे हैं। जिससे सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। सुरेश मिश्रा को 24 जून को निलंबित कर दिया गया था।







