छत्तीसगढ़सामाजिक सरोकार

बिलासपुर में मनाया गया सिंधी कल्चर डे

ऐतिहासिक सफलता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अनूठा संगम, परंपरा, जोश और सामाजिक एकता का अभूतपूर्व प्रदर्शन

NNH बिलासपुर/ बिलासपुर के सांस्कृतिक पटल पर सिंधी कल्चर डे के अवसर पर एक ऐसा ऐतिहासिक और भव्य सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन हुआ, जिसने न केवल शहर के सिंधी समाज को एक सूत्र में पिरोया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी समृद्ध विरासत को सहेजने का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। “दिल तुंजी, मुंहजी हिक आ असांजे में डाडो प्रेम आ” की हार्दिक भावना को मूर्त रूप देते हुए, समाज के वरिष्ठजनों और ऊर्जावान युवाओं के संयुक्त प्रयास से गठित “डाडो सुठो कमेटी, बिलासपुर” ने अपने पहले ही प्रयास में कुंदन पैलेस में एक अविस्मरणीय उत्सव का सफल आयोजन कर इतिहास रच दिया। इस आयोजन की भव्यता, सुव्यवस्थित प्रबंधन और सांस्कृतिक गहराई ने उपस्थित जनसमूह के हृदय को स्पर्श किया, जिसके परिणामस्वरूप यह कार्यक्रम सचमुच में ‘डाडो सुठो’ (बहुत अच्छा) सिद्ध हुआ।

आस्था और परंपरा से शुभारंभ: झूलेलाल जी की महा आरती
यह भव्य उत्सव, जिसका उद्देश्य सिंधी संस्कृति की जड़ों को मज़बूत करना था, उसका आरंभ भी अत्यंत श्रद्धा और परंपरा के साथ हुआ। रात्रि 7 बजे, कार्यक्रम स्थल पर भगवान झूलेलाल जी की एक दिव्य और भव्य प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर महा आरती की गई। इस पवित्र अनुष्ठान ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

​इस ऐतिहासिक अवसर पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। मुख्य अतिथि के रूप में संत सांई लाल दास जी के सुपुत्र वरुण सांई उपस्थित रहे, जिनके आशीष वचनों से समाज को प्रेरणा मिली। छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के कार्यकारी अध्यक्ष महेश रोहरा, महासचिव बलराम आहूजा, छत्तीसगढ़ युवा विंग अध्यक्ष विकास रूपरेला, और रायपुर से आए अर्जुन लखवानी, अनिल लाहोरी, अमर चंवादनी, मनीष पंजवानी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

Back to top button