महाराष्ट्रराजनीति

क्या एक होंगे उद्धव और राज: मुम्बई के ठाणे में लगे पोस्टर से ठाकरे बंधुओं की एकता पर हो रही चर्चा ने पकड़ा जोर

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे के बयान ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। फिल्म निर्देशक महेश मांजरेकर के साथ किए गए एक पॉडकास्ट में राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसमे राज ने कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ मेरे राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अगर महाराष्ट्र के हित के लिए हमको एक होना होगा तो मैं उसके लिए तैयार हूं।

वहीं इसपर शिवसेना UBT के प्रवक्ता संजय राउत ने कहाब अभी तक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना-यूबीटी के बीच कोई गठबंधन नहीं है, केवल भावनात्मक बातचीत चल रही है। गठबंधन के सवाल पर संजय राउत ने कहा राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों भाई हैं। हम सालों से साथ हैं। हमारा रिश्ता नहीं टूटा है। और गठबंधन के बारे में दोनों भाई फैसला करेंगे।

अब महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे परिवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। राज ठाकरे के बयान के बाद ठाणे के पड़वल नगर इलाके में लगा एक भावनात्मक पोस्टर, जिसने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा बल्कि पूरे राज्य में सियासी हलचल मचा दी। इस बैनर पर शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे और शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की तस्वीर एक साथ नजर आई। पोस्टर पर लिखा संदेश था- “महाराष्ट्रासाठी व मराठी माणसाच्या हितासाठी एकत्र!” यानी “महाराष्ट्र और मराठी माणूस के हित के लिए एकजुट!” इस बैनर ने ठाकरे बंधुओं की एकता की संभावना को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

यह पोस्टर ठाणे के पड़वल नगर में लगाया गया, जो महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है। शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के बीच चल रही सियासी जंग के बीच इस बैनर का सामने आना अपने आप में एक बड़ा संदेश है। बैनर में बाला साहेब ठाकरे के साथ उनके बेटे उद्धव और भतीजे राज की तस्वीर ने लोगों को पुरानी यादों में ले जाकर भावुक कर दिया। यह तस्वीर उस दौर की याद दिलाती है जब ठाकरे परिवार एकजुट होकर मराठी अस्मिता और हिंदुत्व के लिए लड़ता था।

सोशल मीडिया पर भी इस पोस्टर की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। एक्स पर कई यूजर्स ने इसे शेयर करते हुए लिखा कि अगर उद्धव और राज एक साथ आते हैं, तो यह महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला सकता है। एक यूजर ने लिखा, “उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एकत्र येणार अशा चर्चा सुरू झाल्या आणि शिंदे सेना, भाजपच्या पायाखालची वाळू सरकली।”

इस पोस्टर में क्या है संदेश…?

पोस्टर में संदेश साफ है कि मराठी माणूस और महाराष्ट्र के हित के लिए ठाकरे बंधुओं को एकजुट होना चाहिए। हाल के दिनों में राज ठाकरे ने उद्धव के साथ गठबंधन की संभावना पर सकारात्मक बयान दिए हैं। एक इंटरव्यू में राज ने कहा, “महाराष्ट्र के अस्तित्व और मराठी माणूस के लिए हमारे झगड़े और विवाद छोटी बातें हैं। एकजुट होने में कोई दिक्कत नहीं, बस इच्छा का सवाल है।”

उद्धव ठाकरे ने भी इस पर जवाब देते हुए कहा, “मैं सभी मराठी लोगों से अपील करता हूं कि मराठी माणूस के हित के लिए एकजुट हों, लेकिन शर्त है कि जो महाराष्ट्र के हित के खिलाफ काम करे, उसे मैं घर नहीं बुलाऊंगा।” उद्धव का यह बयान इशारों-इशारों में उन नेताओं की ओर था, जो पहले उनके साथ थे और अब महायुति सरकार का हिस्सा हैं।

ठाकरे बंधुओं की एकता की संभावना और सियासी समीकरण

ठाकरे बंधुओं की एकता की बात कोई नई नहीं है। 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर MNS बनाई थी, जिसके बाद दोनों भाइयों के बीच सियासी दुश्मनी की खबरें सुर्खियों में रहीं। हालांकि, हाल के महीनों में मराठी अस्मिता और महाराष्ट्र के हित जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के सुर एक जैसे नजर आए हैं। खास तौर पर नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य करने के फैसले का दोनों ने कड़ा विरोध किया।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के अनुसार, “बाला साहेब ठाकरे की सियासी विरासत अब न तो उद्धव की शिवसेना में बची है और न ही राज की MNS में। बीजेपी ने हिंदुत्व और मराठी अस्मिता की सियासत को अपने कब्जे में ले लिया है।” ऐसे में अगर ठाकरे बंधु एकजुट होते हैं, तो यह न केवल शिवसेना की खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश हो सकती है, बल्कि बीजेपी और शिंदे गुट के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी।

लोगों की भावना और सोशल मीडिया का मूड

ठाणे में लगे इस बैनर ने न केवल सियासी गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि आम लोगों के बीच भी ठाकरे बंधुओं की एकता की उम्मीद जगा दी। एक्स पर एक पोस्ट में लिखा गया, “एकनाथ शिंदेच्या बालेकिल्ल्यात ठाकरे बंधूंसाठी बॅनरबाजी! महाराष्ट्रासाठी व मराठी माणसाच्या हितासाठी एकत्र!” कई यूजर्स का मानना है कि अगर उद्धव और राज एक साथ आते हैं, तो मुंबई महानगरपालिका (BMC) और अन्य निकाय चुनावों में महायुति को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

हालांकि, कुछ लोग इसे सिर्फ भावनात्मक अपील मान रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह बैनर सिर्फ लोगों की भावनाओं को भुनाने की कोशिश है। सियासी एकता इतनी आसान नहीं।” फिर भी, मराठी माणूस के बीच ठाकरे परिवार की लोकप्रियता और बाला साहेब की विरासत का असर आज भी बरकरार है।

आगे क्या हो सकता है…?

यह बैनर भले ही एक छोटी सी घटना हो, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश महाराष्ट्र की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है। राज ठाकरे ने हाल ही में एकनाथ शिंदे से मुलाकात अटकलों को हवा दी। अब ठाकरे बंधुओं की एकता की बात ने इन अटकलों को और मजबूत किया है।

क्या उद्धव और राज वाकई अपने पुराने मतभेद भुलाकर एकजुट होंगे? क्या मराठी माणूस और महाराष्ट्र के हित के लिए दोनों भाई फिर से एक मंच पर नजर आएंगे? यह सवाल फिलहाल हर किसी के जेहन में है। लेकिन इतना तय है कि ठाणे में लगा यह पोस्टर महाराष्ट्र की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

 

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