सावरकर राइटर भी थे और फाइटर भी थे: अमित शाह

NNH National/ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को अंडमान निकोबार में विनायक दामोदर सावरकर को श्रद्धान्जलि दी। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर ने ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की अवधारणा की नींव रखी। वे श्री विजयपुरम में सावरकर की कविताओं के संग्रह ‘सागर प्राण तळमळा’ के 115 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
अमित शाह ने कहा कि सावरकर जी राइटर भी थे, फाइटर भी थे। वे जन्मजात देशभक्त थे, आर्ष-द्रष्टा भी थे। वे समाज-सुधारक, कवि और लेखक भी थे। गद्य और पद्य, दोनों पर सिद्धहस्त होना बहुत कम लेखकों को प्राप्त होता है। मैंने उनके साहित्य को बहुत अच्छी तरह पढ़ा है, और मैं आज भी निर्णय नहीं कर सकता कि वे अच्छे कवि थे या लेखक; वे दोनों ही रूपों में उत्कृष्ट थे।
वे बाद में एक महान भाषाशास्त्री भी बने। अनेक नए शब्द बनाकर उन्होंने हमारी भाषा को समृद्ध बनाया। लगभग 600 से अधिक शब्द ऐसे हैं जो हमारी भाषाओं को समृद्ध बनाने के लिए वीर सावरकर जी ने दिए हैं
अमित शाह ने कहा कि सावरकर की विचारधारा को देशभर में प्रसारित किए जाने की आवश्यकता है और माता-पिता को इसे अपने बच्चों से साझा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भी इसी विचारधारा से प्रेरणा लेती है।
गृह मंत्री ने सावरकर को एक लेखक, योद्धा और देशभक्त बताया
गृहमंत्री शाह ने सावरकर को एक लेखक, योद्धा, जन्मजात देशभक्त और दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि बहुत कम साहित्यकार ऐसे होते हैं जो गद्य और पद्य दोनों में समान रूप से दक्ष हों, और सावरकर उनमें से एक थे। उन्होंने कहा, “मैंने उनका साहित्य ध्यानपूर्वक पढ़ा है और आज भी यह तय नहीं कर पाता कि वे बेहतर कवि थे या लेखक, क्योंकि वे दोनों ही रूपों में अद्वितीय थे। बाद में वे महान भाषाविद भी बने। उन्होंने कई नए शब्द गढ़कर भाषा को समृद्ध किया। ऐसे लगभग 600 से अधिक शब्द सावरकर द्वारा निर्मित हैं।”
सावरकर की प्रतिमा का अनावरण

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा अनावरण का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि यह प्रतिमा वीर सावरकर के बलिदान, संकल्प और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों को सावरकर के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र की एकता एवं सुरक्षा के संकल्प से प्रेरित करेगी।







